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शंकराचार्य को धमकी मामले में पुलिस पर उठे सवाल, संत-विद्वानों की आपात बैठक में जताया रोष

वाराणसी: शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्या मठ में रविवार को एक उच्च-स्तरीय आपातकालीन बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को फोन पर मिली जान से मारने की धमकी और उसके बाद प्रशासन, विशेषकर भेलूपुर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा रोष व्यक्त किया गया।

बैठक में मौजूद संतों, विद्वानों और विधि विशेषज्ञों ने पुलिस की कथित शिथिलता और संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल उठाए। अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने कहा कि डिजिटल माध्यम से मिली धमकी के बावजूद आईटी एक्ट की धाराएं न जोड़ना प्रशासन की गंभीर लापरवाही और तथ्यों को दबाने का प्रयास प्रतीत होता है।

प्रशासन पर उठे तीखे सवाल
बैठक के दौरान विज्ञप्ति जारी कर प्रशासन से कई अहम सवाल पूछे गए। इसमें संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने के बावजूद 48 घंटे तक एफआईआर दर्ज करने में देरी पर सवाल उठाया गया। साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या आरोपियों को बचाने के लिए जानबूझकर कमजोर धाराएं लगाई गईं। वक्ताओं ने आरोपी के अब तक फरार रहने को पुलिस की कार्यकुशलता पर सवाल बताया।

ये रखी गईं प्रमुख मांगें
वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीकांत त्रिपाठी की अध्यक्षता में बैठक में शासन-प्रशासन के सामने कई मांगें रखी गईं—

  • एफआईआर में तत्काल कड़ी धाराएं जोड़ी जाएं
  • आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए
  • लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हो

बैठक में उपस्थित संतों और विद्वानों ने एक स्वर में कहा कि शंकराचार्य करोड़ों सनातन हिंदुओं की आस्था के केंद्र हैं और इस तरह की घटना पूरे समाज का अपमान है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक स्तर पर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

सभा में साध्वी पूर्णाम्बा, साध्वी शारदाम्बा, ब्रह्मचारी परमात्मानंद, पूर्व बार अध्यक्ष प्रभु नारायण, बनारस बार एसोसिएशन अध्यक्ष विनोद शुक्ल सहित कई अधिवक्ता और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

जेड प्लस सुरक्षा की मांग
मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने केंद्र सरकार से शंकराचार्य को जेड प्लस सुरक्षा देने की मांग करते हुए कहा कि देश के करोड़ों सनातनियों की आस्था से जुड़े धर्मगुरु की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि अन्य व्यक्तियों को सुरक्षा दी जा सकती है, तो शंकराचार्य को क्यों नहीं।

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