Search
Close this search box.

बांसडीह तहसील में गोंड समुदाय का सत्याग्रह: जाति प्रमाण पत्र जारी करने में भेदभाव का आरोप

बलिया । जनपद में तहसील परिसर में गोंड अनुसूचित जनजाति के लोगों द्वारा प्रमुख सचिव के शासनादेश के अनुपालन की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन सत्याग्रह धरना 28 अप्रैल 2026 को भी जारी रहा। धरनार्थियों का आरोप है कि तहसील प्रशासन द्वारा जाति प्रमाण पत्र जारी करने में दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है, जिससे गोंड समुदाय के छात्र-नौजवानों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश शासन के समाज कल्याण अनुभाग-3 द्वारा जारी 3 नवम्बर 2021 के शासनादेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि भू-राजस्व अभिलेखों की फसली प्रविष्टियों या अन्य प्रमाणों में ‘गोंड’ अंकित पाया जाता है और उसकी पुष्टि अभिलेखागार से हो जाती है, तो जाति प्रमाण पत्र तत्काल जारी किया जाना चाहिए। इसके बावजूद तहसील स्तर पर आवेदनों को बार-बार निरस्त किया जा रहा है।

धरने के दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि 7 अप्रैल 2026 को तहसीलदार द्वारा चार व्यक्तियों को गोंड अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी किया गया, जबकि उसी प्रकार के साक्ष्य प्रस्तुत करने वाले अन्य आवेदकों के आवेदन अस्वीकृत कर दिए गए। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इसी बीच उपजिलाधिकारी बांसडीह ने धरना स्थल पर पहुंचकर नोटिस जारी किया और 10 दिन के भीतर धरना समाप्त करने का निर्देश दिया। पुलिस बल की मौजूदगी में धरना हटवाया भी गया। इसके बावजूद गोंड समुदाय के लोगों में आक्रोश बना हुआ है। उनका कहना है कि जाति प्रमाण पत्र न मिलने के कारण छात्रवृत्ति, उच्च शिक्षा में प्रवेश और सरकारी नौकरियों के आवेदन से वे वंचित हो रहे हैं।

धरने में शामिल लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शासनादेश का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, तो वे आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे।

संजय सिंह रिपोर्टिंग बलिया।

Leave a Comment

और पढ़ें