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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की गविष्ठी यात्रा का भव्य स्वागत, गौरक्षा पर दिया ‘कालनेमि को पहचानो’ का संदेश

वाराणसी ।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के सान्निध्य में गोरखपुर से निकली 81 दिवसीय गविष्ठी गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा के वाराणसी पहुंचने पर सनातनी समाज ने जगह-जगह पुष्पवर्षा, ढोल-नगाड़ों और जयघोष के साथ भव्य स्वागत किया। रोहनिया, लंका, सिगरा, रथयात्रा, कचहरी और जाल्हूपुर समेत कई स्थानों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे। मातृशक्ति द्वारा निकाली गई कलश यात्रा आकर्षण का केंद्र रही।

गौसभाओं को संबोधित करते हुए शंकराचार्य जी ने “कालनेमि को पहचानो” विषय पर ओजस्वी प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में धर्म विरोधी शक्तियां धार्मिक वेश धारण कर समाज को भ्रमित कर रही हैं। रामायण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि केवल तिलक, भगवा वस्त्र या जय श्रीराम का उद्घोष किसी को धार्मिक नहीं बनाता, बल्कि हृदय में धर्मभाव आवश्यक है।

उन्होंने गौहत्या और ‘बीफ’ निर्यात के मुद्दे पर भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि भैंस के मांस की आड़ में गौमांस व्यापार हो रहा है। सभा में उपस्थित लोगों ने वैदिक मंत्र “अहं हन्मि वृत्रं गविष्टौ” का सामूहिक उच्चारण कर गौरक्षा का संकल्प लिया।

शंकराचार्य जी ने चेतावनी दी कि यदि 81 दिवसीय यात्रा पूर्ण होने तक सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए तो 24 जुलाई को लखनऊ में विशाल आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी। मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि यात्रा अब अजगरा, पिंडरा, सेवापुरी और भदोही की ओर प्रस्थान करेगी।

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