Search
Close this search box.

लखनऊ: राजकीय शिक्षक संघ की मांग, ऑनलाइन उपस्थिति प्रक्रिया हो स्थगित

लखनऊ: राजकीय शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश (मूल संघ) ने प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की ऑनलाइन उपस्थिति की अनिवार्यता को तत्काल प्रभाव से स्थगित किए जाने की मांग की है।

संघ के प्रदेश कार्यकारी महामंत्री डॉ. अशोक कुमार अवाक ने इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह को एक ज्ञापन सौंपते हुए आग्रह किया कि वर्तमान व्यावहारिक समस्याओं और भौगोलिक विषमताओं को ध्यान में रखते हुए, ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए।

भौगोलिक और आर्थिक विषमताएं बाधा बनीं

डॉ. अवाक ने कहा कि सोनभद्र, हमीरपुर, बाँदा, चित्रकूट, झांसी, मिर्जापुर, महोबा, लखीमपुर-खीरी जैसे अनेक जनपदों में भौगोलिक परिस्थितियाँ अत्यंत प्रतिकूल हैं, जहाँ इंटरनेट की धीमी गति या अनुपलब्धता के कारण न तो छात्र-छात्राएं सुचारु रूप से उपस्थिति दर्ज कर पा रहे हैं, और न ही शिक्षकों की उपस्थिति में पारदर्शिता रह पा रही है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि गरीब तबके के विद्यार्थी, जो किसी प्रकार मजदूरी करते हुए अपनी शिक्षा जारी रखे हुए हैं, यदि उपस्थिति न दर्ज हो पाने के कारण परीक्षा से वंचित कर दिए गए, तो यह उनके साथ अन्याय होगा और सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘सब पढ़ें, सब बढ़ें’ जैसी नीतियों की भावना को ठेस पहुँचेगी।

तीन स्तर की उपस्थिति प्रणाली को बताया अव्यवहारिक

डॉ. अवाक ने यह भी बताया कि वर्तमान में शिक्षकों से पहले पंजी पर हस्ताक्षर, फिर बायोमेट्रिक उपस्थिति, और अब ऑनलाइन उपस्थिति की अनिवार्यता की जा रही है, जो कि समय, ऊर्जा और संसाधनों की बर्बादी है। उन्होंने सुझाव दिया कि इन तीनों में से केवल एक प्रणाली को अपनाया जाए।

उन्होंने कहा कि इसी पारंपरिक उपस्थिति पद्धति के अंतर्गत प्रदेश के छात्रों ने राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सफलता प्राप्त की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विश्वास और समर्पण ही व्यवस्था की मूल शक्ति होनी चाहिए, न कि प्रौद्योगिकी पर अत्यधिक निर्भरता।

तकनीकी समस्याओं पर भी जताई चिंता

डॉ. अवाक ने यह भी बताया कि ऑनलाइन उपस्थिति पोर्टल में लॉगिन संबंधी तकनीकी त्रुटियाँ, कक्षा 9 व 11 के अनुत्तीर्ण छात्रों का स्वतः उच्च कक्षा में नामांकित हो जाना, और विलोपन की सुविधा का अभाव जैसी समस्याएँ भी सामने आ रही हैं।

सरकार से की अपील

अंत में डॉ. अवाक ने मांग की कि-

  1. माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन उपस्थिति प्रक्रिया को तात्कालिक रूप से स्थगित किया जाए।
  2. यदि इसे लागू किया जाना है, तो पहले इसे बेसिक विद्यालयों में प्रायोगिक रूप से लागू कर मूल्यांकन किया जाए।
  3. सभी बोर्डों, सहायता प्राप्त व अशासकीय विद्यालयों के लिए समान नीति और संसाधन उपलब्ध कराए जाएँ।
  4. शिक्षकों पर से अविश्वास की मानसिकता समाप्त की जाए।

Leave a Comment

और पढ़ें