गाजीपुर: जिले में यूरिया खाद की भारी कमी से किसान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। धान की बुवाई के महत्वपूर्ण समय में खाद की अनुपलब्धता ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। हालात ऐसे हैं कि जैसे ही किसी सहकारी सरकारी गोदाम में खाद की आपूर्ति होती है, वहां लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं।
शासन और प्रशासन की ओर से समय पर खाद उपलब्ध कराने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो पाई है। किसानों का कहना है कि जिलाधिकारी और जिला कृषि अधिकारी को स्थिति से कई बार अवगत कराया जा चुका है, फिर भी यूरिया की आपूर्ति अब तक सुनिश्चित नहीं की जा सकी है।
स्थिति को और बदतर बनाते हुए निजी खाद विक्रेता यूरिया को मनमानी कीमतों पर बेच रहे हैं। प्रशासन की ओर से ऐसे व्यापारियों पर भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है। किसानों के लिए यह दोहरी मार जैसी स्थिति बन गई है, एक ओर खाद नहीं मिल रही, दूसरी ओर उन्हें ऊंचे दाम पर खाद खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि धान की खेती के लिए वर्तमान में यूरिया का कोई व्यावहारिक विकल्प मौजूद नहीं है। ऐसे में खाद की कमी सीधे तौर पर कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। हालांकि जैविक खेती को लेकर सरकार और विशेषज्ञों की सोच सकारात्मक है, लेकिन भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में यह प्रयोग मौजूदा समय में व्यावहारिक नहीं लगता। अमेरिका जैसे देशों में जहां प्रति व्यक्ति भूमि ज्यादा है, वहां जैविक खेती संभव है, लेकिन भारत में यह विकल्प अभी व्यापक स्तर पर किसानों की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता।
सर्वदलीय तहसील विकास जन कल्याण समिति, जखनियां, गाजीपुर ने शासन और प्रशासन से आग्रह किया है कि इस गंभीर समस्या पर शीघ्र ध्यान दिया जाए और सभी सहकारी गोदामों में यूरिया खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो किसानों की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।









