दीपावली की खुशियों के बीच इस बार एक नया और खतरनाक फन ट्रेंड व्यापक रूप से फैला है। प्लास्टिक पीवीसी पाइप और कैल्शियम कार्बाइड से बने कच्चे-झटपट बने “कार्बाइड गन” की रील्स और वीडियोज़ सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कई शहरों में इसे खिलौने की तरह बिकाया जा रहा है। इसके चलते मध्य प्रदेश समेत कई स्थानों पर बच्चों के गंभीर घायल होने और आँखों में चोट लगने की रिपोर्टें मिल रही हैं।
क्या होता है और कैसे बनते हैं ये ‘गन’
स्थानीय स्तर पर पीवीसी पाइप को लिया जाता है, उसमें पानी भरकर कैल्शियम कार्बाइड (कार्बाइड) के कुछ दाने डाले जाते हैं और ऊपर पत्थर डालकर सीज़न-प्रैशन/हिलाकर दबाया जाता है। जब पत्थर निकाला जाता है या किसी तरह चिंगारी लगती है तो अचानक तेज़ धमाका होता है — जिससे तेज़ दबाव व शॉक किरण निकलती है और उड़ते मलबे/कण निकले की वजह से आँख, चेहरा व शरीर गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं। सोशल मीडिया पर इसे ‘कूल’ या ‘ग्रीन पटाखा’ बताया जा रहा था, जिससे इसकी मांग बढ़ गई।
मामलों की गंभीरता — आंकड़े और असर
-अवधिक रिपोर्टों के अनुसार सिर्फ मध्य प्रदेश के कुछ शहरों — भोपाल, विदिशा, ग्वालियर और इंदौर — में ही इस प्रयोग से सैकड़ों बच्चे अस्पताल पहुंचाए गए; कुछ खबरों में 122 से अधिक अस्पताल में भर्ती होने की सूचना है और दर्जनों को आँखों की गंभीर चोटें आईं। कुछ रिपोर्टों में कई बच्चों की दृष्टि स्थायी रूप से प्रभावित होने की खबरें भी आई हैं।
अस्पतालों और डॉक्टर क्या कह रहे हैं
डॉक्टरों का कहना है कि कार्बाइड से पैदा होने वाला शॉक व उड़ते कण आँख की पपड़ी (रॉड/कोर्निया) और रेटिना को नुकसान पहुँचा सकता है; तेज़ उबलते द्रव और कण चेहरे व हाथों पर जलन, झुलस या काटनुमा घाव भी कर देते हैं। समय पर सही मेडिकल इंटर्वेंशन ज़रूरी है; हालाँकि कुछ मामलों में दृष्टि की हानि स्थायी हो सकती है।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
कई जिलों में पुलिस ने इन घरेलू गन बनाने और बेचने वालों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर वायरल करने वाले कंटेंट की पहचान और हटाने की भी कोशिशें की जा रही हैं। प्रशासन ने अभिभावकों से निर्देश दिए हैं कि वे बच्चों को ऐसे किसी भी प्रयोग/खिलौने से दूर रखें और संदिग्ध दुकानों के बारे में सूचना दें।
नागरिकों व अभिभावकों के लिए तत्काल चेतावनी
- बच्चों को किसी भी प्रकार की घरेलू या जुगाड़ बनी “गन”/डिवाइस से दूर रखें।
- यदि किसी ने आँख या चेहरा प्रभावित हुआ हो तो फौरन नज़दीकी अस्पताल/नेत्र विशेषज्ञ के पास ले जाएँ — लेटने पर नुकसान स्थायी हो सकता है।
- सोशल मीडिया पर जो भी ऐसा कंटेंट दिखे, उसे न अपनाएँ; उस वीडियो/रील की रिपोर्ट करें और बच्चों के साथ साझा न करें।









