लखनऊ। इलहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कैसरबाग सिविल कोर्ट परिसर के आसपास अतिक्रमण हटाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने जिला अदालत में पिछले एक सप्ताह से कामकाज प्रभावित होने पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट कहा कि किसी भी स्थिति में 24 घंटे से अधिक हड़ताल नहीं की जा सकती।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने अनुराधा सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला दिया और कहा कि न्यायिक कार्य बाधित करना नियमों के विरुद्ध है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि अदालत के कामकाज में बाधा डाली गई तो संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।
सुनवाई के दौरान वकीलों के बीच लाठियां बांटने का वायरल वीडियो भी कोर्ट के संज्ञान में आया। इस पर खंडपीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए प्रशासन से सवाल किया कि ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। अदालत ने कहा कि न्यायालय परिसर में कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
कोर्ट ने माना कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जनहित में की जा रही है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि कोर्ट परिसर के आसपास अवैध कब्जों के कारण एम्बुलेंस तक फंस जाती है और इसी वजह से एक मरीज की जान भी जा चुकी है। हालांकि, सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि एक फोटो कॉपी की दुकान गलती से तोड़ी गई थी, जिसकी भरपाई की जा रही है।
अधिवक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने बताया कि कैसरबाग स्थित पुरानी तहसील की जमीन वकीलों के चैंबर निर्माण के लिए आवंटित करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस संबंध में संबंधित बार एसोसिएशनों को आधिकारिक सूचना भी भेज दी गई है।








