वाराणसी। बीएचयू में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। ओबीसी वर्ग में पहली रैंक हासिल करने वाली छात्रा को मेन कैंपस के बजाय डीएवी कॉलेज आवंटित किए जाने के मामले में पिछड़ा वर्ग आयोग ने बीएचयू प्रशासन को नोटिस जारी किया है। आयोग ने इसे प्रवेश प्रक्रिया में संभावित अन्याय मानते हुए कुलपति से 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, छात्रा ने आरोप लगाया है कि बेहतर रैंक होने के बावजूद उसे मुख्य परिसर में प्रवेश नहीं दिया गया, जबकि उससे कम रैंक वाले अभ्यर्थियों को मेन कैंपस आवंटित कर दिया गया। शिकायत मिलने के बाद आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 338 बी के तहत कार्रवाई करते हुए मामले की जांच शुरू की है।
आयोग ने अपने नोटिस में कहा है कि पीएचडी प्रवेश के दौरान कॉलेज आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता और आरक्षण नियमों के पालन को लेकर सवाल उठे हैं। तय समय सीमा में जवाब न मिलने की स्थिति में आयोग सिविल कोर्ट की शक्तियों का प्रयोग करते हुए कुलपति या उनके प्रतिनिधि को तलब कर सकता है।
वहीं, बीएचयू के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने नोटिस की जानकारी होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि ऐसा कोई पत्र अब तक उनके संज्ञान में नहीं आया है। मामले को लेकर विश्वविद्यालय परिसर और छात्र संगठनों में चर्चा तेज हो गई है।








