लखनऊ। राजधानी लखनऊ में विधानभवन, बापू भवन और बड़ा इमामबाड़ा समेत कई अहम सरकारी और भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाकर सिलसिलेवार आतंकी हमलों की साजिश रची गई थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी को मिले इनपुट के अनुसार आरोपितों ने लखनऊ आकर कई संवेदनशील स्थानों की रेकी की थी और विस्फोटक तैयार करने के लिए सुनसान इलाके की तलाश भी की थी।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, लालकिला के पास हुए कार बम विस्फोट मामले की जांच के दौरान एनआईए को ऐसे तथ्य मिले, जिनसे पता चला कि आतंकी नेटवर्क की नजर लखनऊ पर भी थी। जांच में सामने आया है कि विधानभवन, बापू भवन, बड़ा इमामबाड़ा, लालबाग और अमीनाबाद जैसे इलाके संभावित टारगेट बनाए गए थे। एजेंसी का मानना है कि इन स्थानों पर हमले कर प्रशासनिक तंत्र और आम लोगों के बीच दहशत फैलाने की योजना थी।
सूत्रों के अनुसार, मामले के दो मुख्य आरोपित डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद 25 से 30 अगस्त 2025 के बीच फरीदाबाद से लखनऊ पहुंचे थे। दोनों शाहीन के एक रिश्तेदार के घर पर ठहरे थे। इसी दौरान मुजम्मिल ने शहर के कई संवेदनशील इलाकों की रेकी की और संभावित टारगेट्स का आकलन किया।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपित शहर में किसी सुनसान स्थान की तलाश कर रहे थे, जहां वे गुप्त रूप से विस्फोटक तैयार कर सकें और अपनी गतिविधियों को अंजाम दे सकें। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, पूरी साजिश बेहद सुनियोजित थी और इसमें टारगेट चयन से लेकर हमले की तैयारी तक कई स्तरों पर प्लानिंग की गई थी।
एनआईए ने इस मामले में 14 मई को 7500 पन्नों का विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किया है। आरोपपत्र में लखनऊ में संभावित आतंकी हमलों की साजिश, रेकी और संदिग्ध गतिविधियों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। फिलहाल जांच एजेंसियां आरोपितों के नेटवर्क, संपर्कों और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी गहन जांच कर रही हैं।








