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भगवान का अवतार या रेप का गुनहगार! आश्रम की सुरंग और ‘बाबा’ राधामोहन मिश्रा का ‘गंदा खेल’

महाराष्ट्र पुणे पुलिस ने राधामोहन मिश्रा नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो खुद को भगवान का अवतार बताकर लोगों को ठग रहा था और महिलाओं का शोषण कर रहा था। यह कोई पहली घटना नहीं है, लेकिन इसने एक बार फिर समाज के उस गहरे जख्म को कुरेद दिया है, जिसे हम ‘अंधभक्ति’ कहते हैं। जब पुलिस ने इस बाबा के आश्रम पर छापा मारा, तो वहां मिली चीजें किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थीं—लैपटॉप, पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क और सबसे हैरान करने वाली बात—एक गुप्त सुरंग।सवाल यह उठता है कि आखिर हम कब तक ऐसे ढोंगियों के जाल में फंसते रहेंगे! आइए, इस मुद्दे को गहराई और सरलता से समझते हैं।

कमजोरी का फायदा उठाना: बाबोओ का बिजनेस मॉडल।

इन ढोंगी बाबाओं का काम करने का तरीका बहुत सटीक होता है। ये सीधे उन लोगों को निशाना बनाते हैं जो अपनी जिंदगी में परेशान हैं—चाहे वो बीमारी हो, पैसों की तंगी हो या पारिवारिक झगड़े। जब इंसान हताश होता है, तब उसे सही-गलत का फर्क करना मुश्किल हो जाता है। ये बाबा इसी ‘हताशा’ का फायदा उठाकर खुद को ‘भगवान का दूत’ या ‘अवतार’ घोषित कर देते हैं।

सुरग और डिजिटल डेटा: ये कैसी भक्ति,

किसी आश्रम में सुरंग मिलने का सीधा सा अर्थ है—वहां कुछ ऐसा है जिसे दुनिया से छिपाना है। दूसरी ओर, भारी मात्रा में हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव का मिलना यह दिखाता है कि इन बाबाओं का असली काम ‘भक्ति’ नहीं, बल्कि ‘ब्लैकमेलिंग’ और ‘डिजिटल जालसाजी’ है। ये लोग अक्सर अपनी ही बनाई गई गंदगी को छुपाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं। क्या भगवान को अपनी पूजा करने के लिए सुरंगों की जरूरत पड़ती है? बिल्कुल नहीं।

हम क्यों फंस जाते हैं,

हमारा समाज अक्सर तार्किक होने के बजाय भावुक ज्यादा है। हम चमत्कारों में विश्वास करना चाहते हैं क्योंकि हम मेहनत से ज्यादा ‘शॉर्टकट’ से समस्या हल करना चाहते हैं। लेकिन हमें यह समझना होगा कि चमत्कार बाजार में नहीं मिलते, वे सही कर्मों और विवेक से पैदा होते हैं। जब कोई कहता है कि वह आपकी सारी समस्याएं चुटकियों में हल कर देगा, तो समझ लीजिए कि वह आपकी जेब और आपकी गरिमा दोनों पर डाका डालने वाला है।

जागरूकता ही बचाव है,

ऐसे मामलों से बचने के लिए हमें कुछ बातों को गांठ बांध लेना चाहिए!तर्क का इस्तेमाल करें: अगर कोई खुद को भगवान या भगवान का अवतार बता रहा है, तो वही सबसे बड़ी चेतावनी है कि वह ढोंगी है।आश्रम की चकाचौंध से बचें: भीड़ देखकर किसी की महानता का अंदाजा न लगाएं। कभी-कभी भीड़ भी सुनियोजित होती है।कानून पर भरोसा करें: अगर आप किसी परेशानी में हैं, तो डॉक्टर, वकील, पुलिस या किसी भरोसेमंद दोस्त की सलाह लें, न कि किसी बाबा की।

डिजिटल सुरक्षा: अपनी निजी बातें कभी भी किसी अनजान व्यक्ति या कथित ‘गुरु’ के साथ साझा न करें, क्योंकि आज के दौर में जानकारी ही सबसे बड़ा हथियार और सबसे बड़ा खतरा है।पुणे की यह घटना हमें चेतावनी दे रही है कि भक्ति के नाम पर पनप रहे इस काले कारोबार को जड़ से खत्म करने का समय आ गया है। समाज को अपनी आँखें खोलनी होंगी।

जिस दिन हम यह समझ जाएंगे कि ईश्वर किसी आश्रम में नहीं, बल्कि हमारे अपने कर्मों और दूसरों के प्रति हमारी सेवा में है, उसी दिन ऐसे ढोंगी बाबाओं की दुकानें खुद-ब-खुद बंद हो जाएंगी।याद रखें, अंधभक्ति कभी भी मोक्ष नहीं दिलाती, वह सिर्फ बर्बादी का रास्ता खोलती है।क्या आपको लगता है कि समाज में बढ़ते बाबाओं के इस मायाजाल को रोकने के लिए सरकार को आश्रमों और ऐसी संस्थाओं पर सख्त निगरानी अनिवार्य कर देनी चाहिए!

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