मीरजापुर । अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-1, मीरजापुर के पीठासीन अधिकारी संतोष कुमार गौतम ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप में जेल में निरुद्ध रघुनन्दन की प्रथम जमानत अर्जी खारिज कर दी। जमानत प्रार्थना पत्र संख्या-1484/2026 पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने पीड़िता के न्यायालय में दर्ज बयानों और पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया।
अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता को शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता ने आरोप लगाया कि शादी के लिए दबाव बनाने पर आरोपी ने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की, धमकी दी और बाद में नोटरी के समक्ष शादी कर ली। पीड़िता का कहना है कि अधिवक्ता से जानकारी लेने पर उसे पता चला कि उक्त शादी वैधानिक रूप से मान्य नहीं थी।

वहीं, आरोपी की ओर से आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताते हुए कहा गया कि उसे जबरन शादी के लिए मजबूर किया गया था। आरोपी ने उक्त शादी को शून्य घोषित कराने के लिए परिवार न्यायालय में वाद भी दाखिल करने का हवाला दिया। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि मामले में देरी से शिकायत की गई और आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

न्यायालय ने कहा कि पीड़िता ने धारा 200 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत अपने बयान में स्पष्ट रूप से शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए जाने का आरोप लगाया है। आरोपी की ओर से प्रस्तुत बचाव संबंधी तथ्यों की सत्यता का मूल्यांकन विचारण न्यायालय द्वारा किया जाना है। इन परिस्थितियों में न्यायालय ने जमानत देने का आधार नहीं पाया और रघुनन्दन की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।






