सोनभद्र । भारतीय मजदूर संघ से सम्बद्ध आशा/आशा संगिनी कर्मचारी संगठन, उत्तर प्रदेश इकाई सोनभद्र ने प्रधानमंत्री के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर आशा एवं आशा संगिनी कर्मियों के लिए नियमित वेतन, सामाजिक सुरक्षा तथा अन्य सेवा सुविधाएं लागू करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत देशभर में लगभग 11 लाख आशा एवं आशा संगिनी कर्मी स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनकर कार्य कर रही हैं, लेकिन उन्हें आज भी नियमित वेतन के बजाय केवल प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) के आधार पर काम करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में बताया गया कि आशा कर्मी ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, प्राथमिक उपचार, स्वास्थ्य जागरूकता, स्वच्छता, पोषण, पेयजल, शौचालय निर्माण तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री द्वारा कुछ गतिविधियों पर मिलने वाले इंसेंटिव को दोगुना किए जाने की घोषणा की गई थी, लेकिन अन्य कार्यों के लिए निर्धारित प्रोत्साहन राशि में कोई वृद्धि नहीं हुई। इससे आशा कर्मियों में निराशा व्याप्त है।
संगठन ने रखीं 10 प्रमुख मांगे
संगठन ने मांग की है कि आशा वर्कर्स को राज्य कर्मचारी घोषित करते हुए न्यूनतम 18 हजार रुपये तथा आशा संगिनी को 24 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाए। जब तक यह व्यवस्था लागू न हो, तब तक वर्तमान प्रोत्साहन राशि को दोगुना किया जाए।

इसके अलावा ईपीएफ एवं ईएसआई की सुविधा, आशा संगिनी को सुपरवाइजर का दर्जा, कार्य के लिए 5जी मोबाइल या टैबलेट, निःशुल्क बीमा तथा दुर्घटना में मृत्यु होने पर 10 लाख रुपये मुआवजा, सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि, विजिट के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटी अथवा यात्रा भत्ता, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ तथा आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत उनके परिवार को भी स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने की मांग की गई है।

ज्ञापन में प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना में अधिकतम प्रवेश आयु 40 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष किए जाने की भी मांग उठाई गई है, ताकि अधिक से अधिक आशा एवं आशा संगिनी कर्मी इसका लाभ प्राप्त कर सकें। संगठन ने सरकार से महिला हित, श्रमिक हित और जनहित को ध्यान में रखते हुए सभी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।








