गाजीपुर। उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने आयुष्मान भारत योजना में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए गाजीपुर समेत पांच जिलों में सक्रिय एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। गिरोह फर्जी पहचान और दस्तावेजों के जरिए अपात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड बनवाकर सरकारी योजना का गलत लाभ उठा रहा था। STF ने इस मामले में सात आरोपियों को लखनऊ के गोमतीनगर विस्तार इलाके से गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों में गाज़ीपुर, लखनऊ, बाराबंकी, प्रतापगढ़ और इटावा के निवासी शामिल हैं। पकड़े गए आरोपियों की पहचान चंद्रभान वर्मा (प्रतापगढ़), राजेश मिश्रा, सुजीत कनौजिया, सौरभ मौर्या (तीनों बाराबंकी), विश्वजीत सिंह (गाज़ीपुर), रंजीत सिंह (लखनऊ) और अंकित यादव (इटावा) के रूप में हुई है।
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह लंबे समय से साइबर कैफे संचालकों और ISA (इम्प्लीमेंटेशन सपोर्ट एजेंसी) से जुड़े कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से काम कर रहा था। गिरोह पात्र परिवारों की फैमिली आईडी में तकनीकी तरीके से OTP बायपास कर अपात्र लोगों के नाम जोड़ देता था। इसके बाद ISA और स्टेट हेल्थ एजेंसी स्तर पर सेटिंग कर आयुष्मान कार्ड अप्रूव कराए जाते थे।
एसटीएफ के अनुसार गिरोह का मास्टरमाइंड चंद्रभान वर्मा है, जो प्रति फर्जी कार्ड करीब 6 हजार रुपये वसूलता था। इसमें फैमिली आईडी में नाम जोड़ने के लिए करीब 2 हजार रुपये, ISA स्तर पर 1000 से 1500 रुपये और SHA स्तर पर 4500 से 5000 रुपये तक की रिश्वत दी जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि लखनऊ स्थित कल्याण सिंह कैंसर इंस्टीट्यूट में कार्यरत आयुष्मान मित्र रंजीत सिंह भी इस रैकेट में शामिल था। वह अस्पताल के कंप्यूटर ऑपरेटर की मदद से फर्जी कार्डों में जिले से जुड़ी गड़बड़ियों को ठीक करता था, ताकि उन्हीं कार्डों के जरिए मुफ्त इलाज कराकर अवैध कमाई की जा सके।
एसटीएफ ने बताया कि इसी गिरोह के दो सदस्य पहले भी 17 जून 2025 को प्रयागराज से गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनके पास से 84 फर्जी आयुष्मान कार्ड बरामद हुए थे। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि अब तक 2000 से अधिक फर्जी कार्ड बनवाए जा चुके हैं और करीब 20 लाख रुपये से अधिक की रिश्वत दी जा चुकी है।
फिलहाल एसटीएफ इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य सरकारी और निजी कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।









