इलाहाबाद । हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में प्रशासनिक मनमानी पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रयागराज के एक व्यक्ति को अवैध रूप से आठ दिन तक हिरासत में रखने के मामले में मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि केवल ‘शांति भंग’ की आशंका के आधार पर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक हिरासत में रखना कानून और संविधान द्वारा प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक अधिकारियों को कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई करनी होगी और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती। यह फैसला केवल एक व्यक्ति को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए एक चेतावनी भी है कि अधिकारों के दुरुपयोग की कीमत चुकानी पड़ेगी। अदालत का यह निर्णय लोकतांत्रिक मूल्यों, विधि के शासन और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।









