लखनऊ । में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा के एक बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के कई सांसद पार्टी की कार्यप्रणाली और संगठनात्मक व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं। उनके अनुसार, महिला आरक्षण विधेयक के दौरान सपा के कई सांसद इस कानून का समर्थन करना चाहते थे, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उनकी राय को महत्व नहीं दिया।
दिनेश शर्मा ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उनका आरोप है कि सपा के कुछ जनप्रतिनिधि निजी तौर पर इस विधेयक के पक्ष में थे, लेकिन पार्टी लाइन के कारण खुलकर समर्थन नहीं कर सके। भाजपा नेता के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या वास्तव में समाजवादी पार्टी के भीतर मतभेद मौजूद हैं।
उन्होंने सपा के संगठनात्मक ढांचे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में सभी जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त अवसर नहीं मिलता। ऐसे हालात में असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है। हालांकि, उन्होंने किसी सांसद का नाम नहीं लिया और यह भी कहा कि किसी राजनीतिक दल के अंदरूनी फैसले उसका अपना विषय होते हैं।
भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच लंबे समय से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा रही है। ऐसे में दिनेश शर्मा का यह बयान दोनों दलों के बीच चल रही सियासी खींचतान का हिस्सा माना जा रहा है। भाजपा जहां महिला आरक्षण विधेयक को अपनी बड़ी उपलब्धि बताती है, वहीं विपक्ष इस पर अलग दृष्टिकोण रखता रहा है।
फिलहाल समाजवादी पार्टी की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़े दलों में विचारों का मतभेद सामान्य बात है, लेकिन ऐसे बयानों से राजनीतिक बहस और तेज हो जाती है। अब सबकी निगाहें सपा की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।





