भूख इंसान की सबसे बड़ी जरूरत है, लेकिन जब कुछ लोग भोजन को भी नफरत और अपमान का माध्यम बना लेते हैं, तो यह मानवता पर कलंक बन जाता है। किसी जरूरतमंद को अन्न देने के नाम पर उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाना बेहद निंदनीय है। भोजन दान का उद्देश्य सम्मान और सहानुभूति होना चाहिए, न कि किसी को नीचा दिखाना। याद रखना चाहिए कि देने वाला केवल माध्यम होता है, असली दाता ईश्वर है।
इसलिए किसी की मजबूरी का मजाक उड़ाना या उसे अपमानित करना उचित नहीं है। वहीं, व्यक्ति को भी अपनी आत्मसम्मान की रक्षा करनी चाहिए। जहां सम्मान न मिले, वहां यथासंभव हाथ फैलाने से बचना चाहिए। भूख कठिन हो सकती है, लेकिन स्वाभिमान इंसान की सबसे बड़ी पूंजी है। मानवता, करुणा और सम्मान ही समाज की असली पहचान हैं।






