बलिया । शहर में ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर आम लोगों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का आरोप है कि ट्रैफिक चालान नियमों के आधार पर नहीं, बल्कि व्यक्ति का चेहरा और उसका रसूख देखकर काटा जा रहा है। आम नागरिकों के लिए जहां हेलमेट, सीट बेल्ट और अन्य ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराया जाता है, वहीं नेताओं, रसूखदारों, अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर वही नियम लागू होते नहीं दिखाई देते।
शहरवासियों का कहना है कि कई बार लोगों को यह तक पता नहीं चलता कि उनका ऑनलाइन चालान कब और कैसे कट गया। दूसरी ओर यदि कोई पुलिसकर्मी या सरकारी वाहन चालक बिना हेलमेट या नियमों का उल्लंघन करते हुए दिख जाए, तो उनके खिलाफ कार्रवाई शायद ही देखने को मिलती है। इससे आम जनता के मन में यह भावना बन रही है कि कानून केवल आम लोगों के लिए ही बनाया गया है।
लोगों का यह भी कहना है कि सरकार को राजस्व दिलाने का माध्यम केवल आम जनता को बनाया जा रहा है। यदि ट्रैफिक व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता नहीं लाई गई, तो जनता का भरोसा कमजोर होगा। वर्तमान हालात को देखकर कई लोग यह तक कहने लगे हैं कि विपक्ष से ज्यादा सरकार की छवि को नुकसान स्वयं ट्रैफिक व्यवस्था पहुंचा रही है।
संजय सिंह रिपोर्टिंग बलिया।









