सीतापुर । के खैराबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक डॉक्टर और पत्रकार के बीच कथित अभद्र व्यवहार का मामला चर्चा का विषय बन गया है। आरोप है कि जब पत्रकार ने सरकारी अस्पताल में मरीजों को बाहर से दवाएं लिखे जाने को लेकर सवाल पूछा, तो संबंधित डॉक्टर ने कथित तौर पर अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की जवाबदेही पर बहस तेज हो गई है।
सरकारी अस्पतालों का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निःशुल्क या कम लागत पर उपचार उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि मरीजों को महंगी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती हैं, तो यह स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है। दूसरी ओर, डॉक्टरों का भी पक्ष सामने आना आवश्यक है, क्योंकि कई बार अस्पताल में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सकीय आवश्यकता या अन्य प्रशासनिक कारण भी बाहरी दवा लिखे जाने की वजह हो सकते हैं।
पत्रकारों को जनहित के मुद्दों पर सवाल पूछने का अधिकार है और सरकारी अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे संयमित एवं सम्मानजनक ढंग से जवाब दें। वहीं किसी भी आरोप या विवाद की निष्पक्ष जांच भी आवश्यक है ताकि तथ्य स्पष्ट हो सकें।
यदि इस मामले में डॉक्टर द्वारा अभद्र व्यवहार या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित विभाग द्वारा उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यदि दवाओं की उपलब्धता या व्यवस्था में कोई कमी है, तो उसे भी दूर किया जाना चाहिए। पारदर्शिता, जवाबदेही और सम्मानजनक संवाद ही जनता का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर विश्वास मजबूत कर सकते हैं।







