वाराणसी । शहर को कूड़ा मुक्त और स्वच्छ बनाने के लिए कूड़ा प्रबंधन एवं स्रोत स्तर पर कचरा पृथकीकरण (वेस्ट सेग्रिगेशन) को अपनाना समय की आवश्यकता है। यह बात मंगलवार को सिगरा स्थित होटल कैस्टिलो में प्रजा फाउंडेशन द्वारा आयोजित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विषयक कार्यशाला में कही गई। कार्यक्रम में नगर निगम के पार्षदों को नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों और स्वच्छता अभियान में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका से अवगत कराया गया।

सेप्ट (सीईपीटी) यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद की प्रोफेसर मर्सी ने पार्षदों को प्रशिक्षण देते हुए कहा कि शहर की स्वच्छता केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से ही संभव है। उन्होंने बताया कि घरों में चार रंगों के डस्टबिन का उपयोग आवश्यक है। हरा डस्टबिन गीले कचरे, नीला सूखे कचरे, लाल सैनिटरी वेस्ट तथा काला ई-वेस्ट और बैटरी जैसे खतरनाक घरेलू कचरे के लिए निर्धारित किया गया है।

प्रो. मर्सी ने बल्क वेस्ट जनरेटर संस्थानों की पहचान और निगरानी पर विशेष बल दिया। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से लागू नए नियमों के अनुसार 20 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले, प्रतिदिन 40 हजार लीटर से अधिक जल उपयोग करने वाले अथवा 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों को अपने परिसर में ही गीले कचरे का निस्तारण करना होगा।

कार्यक्रम का संचालन प्रजा फाउंडेशन के अविरल दुबे ने किया। कार्यशाला में बृजेश चंद्र श्रीवास्तव, अशोक मौर्य, विवेक कुशवाहा, मंजू कन्नौजिया, सीमा वर्मा, कुसुम देवी, कौशल्या, रीना, बेबी कुभारी और रमाशंकर पटेल सहित अनेक पार्षद उपस्थित रहे।








